What is DHCP protocol in hindi

 दोस्तों आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से डायनेमिक होस्ट कॉन्फ़िगरेशन प्रोटोकॉल की जानकारी देने की कोशिश करेंगे कृपया आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ें यह पोस्ट आपके लिए बहुत जानकारी देने वाली साबित होगी दोस्तों प्रोटोकॉल तो बहुत सारे हैं बहुत सारे प्रोटोकॉल जैसे टीसीपी हो गया आईपी हुए बहुत सारे प्रोटोकोल है हर प्रोटोकॉल का अपनी कुछ अलग विशेषताएं उन प्रोटोकॉल में डीएचसीपी यानी कि डायनेमिक होस्ट कॉन्फ़िगरेशन प्रोटोकॉल  यह भी एक प्रकार का प्रोटोकॉल इसकी भी अपनी विशेषताएं हैं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे
DYNAMIC HOST CONFIGURATION PROTOCOL (DHCP)

दोस्तों डीएचसीपी को माइक्रोसॉफ्ट  आर ए आर पी और बी ओ ओ टीपी के दोषियों को दूर करने के लिए डीएचसीपी यानी कि डायनेमिक होस्ट कॉन्फ़िगरेशन प्रोटोकॉल बनाया गया है डीएचसीपी का जो आधार है वह बी ओ टी पी के एक बड़े रूप में है किंतु टीसीपी आईपी क्लाइंट के समान सरलता पूर्वक पूर्व निर्धारित कॉन्फ़िगरेशन जो पैरामीटर्स को फीड करने के स्थान पर बीएसईबी फूल से डायनामिक रूप से आईपी एड्रेस एलोकेट करता है और जब यह अधिक समय तक यूज़ में नहीं आता है तो वापस क्लेम करता है डीएचसीपी वर्क स्टेशन को वह डुप्लीकेट IP address  असाइन होने से सेफ्टी प्रदान करता है और सब नेट के चारों ओर manual रहित कॉन्फ़िगर होने के लिए एडमिनिस्ट्रेटर को move करने में हेल्प करता


overview of DHCP

  dynamic host configuration protocol के 3 अवयव होते हैं जो एक दूसरे के मध्य संचार करने के लिए उपयोग किए जाते हैं वे अवयव जो होते हैं पहला है क्लाइंट सरवर और प्रोटोकॉल है आज के टाइम में डीएचसीपी नेटवर्किंग लाइन के साथ एक ताकत होता है जबकि आजकल ऑपरेटिंग सिस्टम भी एकीकृत होने के कारण डीएसीपी को पृथक रूप से निर्भर नहीं करता है माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 200 सिस्टम में उदाहरण स्वरूप जवाब टीसीपी आईपी प्रॉपर्टीज डायल बॉक्स में obtain an IP address automatically को जब हम सेलेक्ट करते हैं तब  तब वास्तविक रूप से डीएचसीपी क्लाइंट को एक्टिव करते हैं डीएचसीपी सर्वर कंप्यूटर पर रंग करने वाली एक एप्लीकेशन होती है जो डीएचसीपी क्लाइंट से सर्विस रिक्वेस्ट प्रदान करती है और विंडोज 2000 सर्वर एवं माइक्रोसॉफ्ट विंडोज एनटी सर्वर दोनों के ऑपरेटिंग सिस्टम में डीएचसीपी सर्वर एप्लीकेशन को शामिल करती है परंतु अन्य प्लेटफार्म के लिए इनमें में कई बदलाव करने पड़ते हैं जैसे डीएससीपी का प्रयोग unix,novell, netwareऔर माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क में बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है एक डीएचसीपी क्लाइंट किसी अन्य प्लेटफार्म पर रन करते हुए डीएचसीपी सर्वर से कॉन्फ़िगरेशन सेटिंग रिट्रीव कर सकता है माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा निर्मित डीएसीपी स्टैंडर्ड पर आधारित होता है जो कि tcp/ip के समक्ष होता है।

1.manual allocation

 जब कंप्यूटर में एडमिनिस्ट्रेटर अपने कंप्यूटर पर डीएससी पीट सरवर में स्पेस स्पेसिफिक आईपी एड्रेस को जवाहर साइन करता है तथा सर्वर कंप्यूटर द्वारा रिक्वेस्ट किए जाने पर उस आईपी को प्रदान करता है।

2. automatic allocation

 डीएचसीपी server के एड्रेस के सामान्य कोमल पोल से आईपी एड्रेस सहित प्लांट सप्लाई करता है और क्लाइंट असाइन किए गए आईपी को सदैव के लिए सुरक्षित कर लेता है।

3. dynamic allocation

 डीएसई सरवर के एड्रेस के कॉमन पॉल को लीव्स आधार पर क्लाइंट को आईपी एड्रेस प्रदान करता है क्लाइन निश्चित रूप से समय अवधि के पश्चात लीज को रिन्यू करता रहता है और एड्रेस वितरित कोष  में पुनः लोकेट हो जाता है

DHCP client communication

 दोस्तों से पहली बार कंप्यूटर बूट होता है तब डीएचसीपी सर्वर क्लाइंट से कम्युनिकेट करना शुरू कर देता है क्लाइंट एक डीएचसीपी डिस्कवर मैसेज को जनरेट करता है और उसे सब तरफ फैला देता है इस कंडीशन में लाइन का कोई आईपी एड्रेस नहीं होता है दूसरे शब्दों में इससे प्रारंभिक अवस्था हम कह सकते हैं अन्य ब्रॉड कास्ट के समान इसका मास लेशन क्लाइंट लोकल नेटवर्क सही सीमित होता है परंतु एडमिनिस्ट्रेटर लोकल एरिया नेटवर्क लेन में उपस्थित कंप्यूटर पर डीएससीपी रिले एजेंट सर्विस को इंस्टॉल कर सकते हैं इसके द्वारा हम अन्य नेटवर्क के डीएचसीपी सर्वर को मैसेज भेज जाता है यह मल्टीपल लेंस पर एक डीएचसीपी सर्वर को सर्विस क्लाइंट के लिए इनेबल कर देता है अधिकतर केस में सर्वर संदेश सीधे क्लाइंट को भेजता है और क्लाइंट उस मैसेज को चारों ओर फैला देता है और कहीं सरवर द्वारा डीएचसीपी ऑफर रेस्पॉन्स रिसीव कर सकता है एक निश्चित समय के पश्चात क्लाइंट संदेश फैलाना और आईपी ऐड्रेस के ऊपर लेना बंद कर देता है अब क्लाइंट डीएसीपी रिक्वेस्ट संदेश को उत्पन्न करता है जिसमें ग्रहण किए गए सरवर का जो एड्रेस होता है वह निहित होता है यह आईपी ऐड्रेस ऑफर किए गए आईपी एड्रेस मैं से एक होता है कथा इस संदेश से हमको यह पता चलता है कि क्लाइंट ने ऑफर किए गए एड्रेस को रिसीव कर लिया है और उसके साथ ही नेटवर्क में उपस्थित अन्य सरवर जो होते हैं उन सरवर को भी यह जानकारी प्रदान करता है कि उन सभी के ऑफर को रिजेक्ट कर दिया गया है या रिसीव कर दिया गया है डीएचसीपी रिक्वेस्ट संदेश को रिसीव करने पर सर्वर ऑफर किए गया आईपी ऐड्रेस को स्वीकार करके अन्य सेटिंग पर क्लाइंट के hardware address ke database combination बेचता है और असाइनमेंट के लिए एक यूनिक आईडेंटिफायर के समान आईपी एड्रेस ऑफर करता है यह जो प्रक्रिया है वह लीज आईडेंटिफिकेशन कुक्की कहलाती है ट्रांजैक्शन के इस बात को सम्मिलित करके server-client को DHCPACK संदेश भेजता है क्योंकि प्रोसेस को पूर्ण करने हेतु कंफर्मेशन प्रदान करता है यदि सर्वर का जो असाइनमेंट हुए वह पूरा नहीं होता है तो हर क्लाइंट dhcpnakसंदेश भेजता है और संपूर्ण प्रक्रिया को आराम से शुरू कर देता है।

 leasing of DHCP

दोस्तों अब बात करते हैं लीजिंग के बारे में डीएसीपी के जो लीजिंग होती है वह क्या होती है तो वह प्रोसेस जिसके द्वारा डीएचसीपी सर्वर जो होता है वह क्लाइंट को कॉन्फ़िगरेशन पैरामीटर असाइन करता है उसे डीएचसीपी लीजिंग कहते हैं सरवर जो होता है वह सरवर मैन्युअल और ऑटोमेटिक औरैया डायनेमिक एलोकेशन का यूज कर सकता है और यह प्रक्रिया मैन्युअल और ऑटोमेटिक एलोकेट के साथ डीएचसीपी सर्वर कम्युनिकेशन पर एंड हो जाती है क्लाइंट इस स्थिति में जो इस साइन की गई जो सेटिंग होती है उस सेटिंग को वह तब तक के लिए सुरक्षित कर लेता है जब तक कोई दूसरा उन्हें चेंज ना करें और पुनः साइन ना करें इसके अतिरिक्त जब सर्वर सेटिंग को डायनेमिक एलोकेट करता है तब क्लाइंड एक निश्चित समय अवधि के लिए आईपी को लीज कर लेता है और इसके बाद उन्हें चलाने के लिए लीज को रिन्यू करना अति आवश्यक हो जाता है दोस्तों गरम बात करें आईपी एड्रेस लीज की लंबाई के बारे में तो आईपी एड्रेस की जो रिलीज होती है उसकी जो लंबाई होती है उसे दिनों में मापा जाता है और यह नेटवर्क के आसपास के सभी कंप्यूटर्स के बार बार मुंह कराने पर ip-address की शार्ट सप्लाई पर यह पूरी निर्भर होती है शॉर्टलिस्ट जो होती है वह दिन नेटवर्क ट्रेफिक उत्पन्न करती है परंतु एनिमल सरवर का यूज में होने वाले एड्रेस को तेजी से रिक्लेम कर देती है और साथ ही साथ इसके सापेक्ष स्टेबल नेटवर्क में डीएससीपी द्वारा उत्पन्न एक लंबी लीज ट्रैफिक की मात्रा को घटा देती है
 दोस्तों लीज प्रक्रिया जो है यह तब आरंभ होती है जब बाउंड क्लाइंट अपनी लिस्ट पहुंच जाता है इसमें लीज के बाउंड्री समय को रिन्यूअल समय मान अथवा P1 मान के नाम से भी जाना जाता है डिफ़ॉल्ट रूप से लीज अवधि का रिन्यूअल समय मान ली सऊदी का 50 परसेंट होता है जब क्लाइंट इस बिंदु तक पहुंच जाता है तब रिन्यू अवस्था में इंटर हो जाता है और डीएससीपी रिक्वेस्ट मैसेज को उत्पन्न करना शुरु कर देता है क्लाइंट इन मैसेज को उन रिसीवर्स को भेजता है जिनकी लीज को वह यूनिकास्ट के रूप में होल्ड कर देता है आरंभिक स्थिति में डीएसीपी रिक्वेस्ट मैसेज को फैलाने के स्थान पर क्लाइंट को उत्पन्न करती है संदेशों को रिसीव करने के लिए यदि सरवर उपलब्ध होता है तो दो स्थितियां घटित हो सकती है पहली स्थिति तो यह है किस सर्वर डीएसीपी NAKमैसेज को रेस्पॉन्ड करके लीज को रिन्यू का संदेश भेज देता है और इस टाइम क्लॉक को पुनः रीस्टार्ट कर देता है और दूसरी स्थिति यह बनती है DHCPNAKएक मैसेज लीज को टर्मिनेट कर देता है और क्लाइंट को एड्रेस असाइनमेंट प्रोसेस को शुरू से आरंभ करने को बहुत सोच कर देता है यदि सरवर डीएसीपी रिक्वेस्ट संदेश को सपोर्ट नहीं कर रहा है तब भी वह क्लाइंट को यह संदेश भेजता रहता है जब तक कि वह रिवाइंडिंग टाइम वैल्यू अथवा टीटू वैल्यू तक नहीं पहुंच जाता डिफ़ॉल्ट रूप से रिवाइंडिंग टाइम वैल्यू टू वैल्यू का मान ली जब दिखा 8.5 प्रतिशत होता है इस मान पर रिवाइंडिंग स्टेट में पहुंच जाता है और एसीपी रिक्वेस्ट संदेश को फैलाना शुरू कर देता है डीएचसीपी क्लाइंट में उपस्थित किसी भी डीएसपी से एड्रेस असाइनमेंट को मांगता है और स्थिति में डीएपी एसी के और डीएनए के दोनों संदेश को सपोर्ट करने में सक्षम हो जाता है यदि इस टाइम बिना रिस्पांस के किसी भी हो जाता है तो क्लाइंट का रिलीज हो जाता है और डिस्कवर ट्रांसमिशन के सभी डीएसपी हो जाते है|
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