5G TECHNOLOGY

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दोस्तों आपके मन में ये प्रशन कई बार आता होगा की  5G टेक्नोलॉजी के बारे में ये 4G से कितना फ़ास्ट होगा  5G मोबाइल कब आयंगे  तो दोस्तों आज इस पोस्ट में आपको बताने वाला हु 5G के बारे में तो प्लोज़ ब्लॉग को पूरा पड़े |
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दोस्तों अगर हम बात करे कुछ सालो पहले की तो  तक़रीबन 10 सालो में मोबाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जनरेशन की बढोतरी होती हे अगर हम बात करे पहले  की तो सन 1980 में 1G(FIRST GENERATION) फिर बाद में 1990 में 2G(SECOND GENERATION) फिर साल 2000 में 3G (THIRD GENERATION) और साल 2010 में 4G (FOURTH GENERATIO) और अब 5G (FIFTH GENERATION) का इंतजार हे तो दोस्तों आज इस पोस्ट में बात करने वाले हे 5G के बारे में |
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5G मतलब FIFTH GENERATION यह LATEST TECHNOLOGY इस से WIRELESS BROADBAND के कनेक्शन के माध्यम से तकरीबन 20 जीबीपीएस से भी ज्यादा स्पीड में ट्रांसमिट  किया जा सकता है 5G नेटवर्क की जो Latency है वह बहुत ही कम है जो 1ms ऑफर करती है और जहां रियल टाइम फीडबैक की अगर बात करें तो रियल टाइप फीडबैक की जरूरत वहां और भी काम है 5जी से भी ज्यादा bandwidth तो और एडवांस्ड antenna टेक्नोलॉजी होने के कारण इसमें ज्यादा अमाउंट की डाटा को वायरलेस के माध्यम से ट्रांसमिट किया जा सकता है

5G network में speed capacity व latency के अलावा भी 5G नेटवर्क दूसरे नेटवर्क मैनेजमेंट फीचर्स भी प्रदान करती है

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Features of 5G technology
आखिर 5G टेक्नोलॉजी में क्या नए नए फीचर होंगे आइए जानते हैं


1. इसमें ab To 10 gbps data rate का होगा तथा इसके साथ ही 10 से 100x की रेट में  नेटवर्क इंप्रूवमेंट होगा


2. इसमें तकरीबन 1000x bandwidth per unit area होगा।


3. 5G नेटवर्क 100 % कवरेज प्रदान करेगा।


और और भी 5G नेटवर्क के कई सारे फीचर्स हैं जो आपको आने वाले दिनों में जब जब 5G लॉन्च हो जाएगा तब आपको यह सब देखने को मिलेगा।


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How to work 5G technology

दोस्तों अगर हम वायरलेस नेटवर्क की बात करें तो वॉयरलैस नेटवर्क्स में मुख्य रूप से सेल साइट्स होते हैं जिनको की सेक्टर्स में डिवाइड किया गया होता है जो की झुमकी हुए हो जाने की रेडियो वेव की मदद से डाटा को सेंड करते हैं जहां पर 4G में बड़े हाई पावर टावर की आवश्यकता होती है सिग्नल को ट्रांसलेट करने के लिए याद सिग्नल को रिसीव करने के लिए तो सिग्नल को रिसीव करने के लिए बहुत सारे small-cell स्टेशंस की भी जरूरत होती है।
जीने की छोटी-छोटी जगहों पर लगाया जाता है जैसे लाइट पॉल हो गया या बिल्डिंग की छतें हो गई बिल्डिंग की छत पर अक्सर आपने देखा होगा कि लगे रहते हैं यहां पर मल्टीपल small-cell का का यूज किया जाता है अब आप यह सोच रहे होंगे ऐसा क्यों होता है क्योंकि यह मिली millimeter-wave में होता है  उसके स्पेक्ट्रम में बैंड ऑफ स्ट्रीम हमेशा 30 गीगा हर्ट से 300 गीगा हर्ट्ज के भीतर ही होती है और जैसा कि हम जानते हैं 5G में हाई स्पीड से पैदा करने की जरूरत भी होगी तो 5G में हाई स्पीड पैदा करने के लिए जो कि केवल शॉर्ट डिस्टेंस ताकि ट्रैवल कर सकता है इसके अलावा यह सिंगल किसी भी वेदर और अदर एक्टिविटी में आसानी से इंटरफ़ेस हो सकता है।
दोस्तों बात करें अगर पहले नेटवर्क की जो जनरेशन होती थी उसके बारे में तो पहले के वायरलेस टेक्नोलॉजी कि अगर हम बात करें तो इसका जो इस स्पेक्ट्रम हो जो होता था उसकी जो फ्रिकवेंसी होती थी वह लो फ्रिकवेंसी बैंड्स का इस्तेमाल होता था उसमें इसके साथ उसकी millimeter-wave जो होती थी जिसमें की डिस्टेंस और इंटरफ़ेस ज्यादा होती थी।
तो दोस्तों इस में ध्यान देने वाली क्या बात है क्या आप जानते हैं इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि लो फ्रिकवेंसी स्पेक्ट्रम हमेशा ज्यादा कवर डिस्टेंस करती है उसका जो कवरेज एरिया जो होता है वह बहुत ज्यादा होता है लेकिन इसकी जो स्पीड होती है वह lower स्पीड और कैपेसिटी होती है मल्टीमीटर वेव की तुलना में।
दोस्तों आज हम हमने आपको बताया 5G टेक्नोलॉजी के बारे में अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमें कमेंट करके बताएं और हमें बताएंगे हम आपके लिए और क्या नई नई पोस्टर ला सके दोस्तों हमारे ब्लॉग को पढ़ने के लिए और हम को सपोर्ट करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

2 thoughts on “5G TECHNOLOGY

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